विश्व बैंक ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.5%
विश्व बैंक ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.5%

विश्व बैंक ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.5%

विश्व बैंक ने अक्टूबर 2025 की दक्षिण एशिया विकास रिपोर्ट (South Asia Development Update) में भारत के वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। यह जून 2025 में जारी 6.3% के पूर्वानुमान से अधिक है। इस संशोधन का मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग, ग्रामीण उपभोग में सुधार और जीएसटी सुधारों के लगातार प्राप्त लाभ को बताया गया है।

विश्व बैंक ने यह भी संकेत दिया कि भारत दक्षिण एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में बनी रहेगी, जबकि क्षेत्रीय और वैश्विक जोखिमों के कारण FY27 के लिए वृद्धि अनुमान थोड़ी कमी के साथ 6.3% तय किया गया है।


 भारत की विकास वृद्धि को बल देने वाले प्रमुख कारक

  1. मजबूत घरेलू खपत:
    भारत का विशाल उपभोक्ता आधार आर्थिक वृद्धि का प्रमुख चालक बना हुआ है। शहरी क्षेत्रों में सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में आय वृद्धि और रोजगार अवसरों का विस्तार लगातार उपभोग को बढ़ावा दे रहा है।

    • शहरी मध्यम वर्ग की बढ़ती आय

    • खुदरा और ई-कॉमर्स में निवेश और विकास

    • शहरों में आधुनिक उपभोक्ता सेवाओं का विस्तार

  2. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान:
    ग्रामीण भारत की मांग भी वृद्धि में सहायक रही है।

    • कृषि उत्पादन में सुधार और अधिक वाजिब मूल्य

    • ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि, जिससे घरेलू खपत बढ़ी

    • अनुकूल मानसून की स्थिति ने फसल उत्पादन और ग्रामीण रोजगार को मजबूत किया

ग्रामीण पुनरुत्थान ने यह सुनिश्चित किया कि भारत का उपभोग-आधारित विकास मॉडल लगातार मजबूत बना रहे।

  1. जीएसटी सुधारों का प्रभाव:
    भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में सुधार से कर अनुपालन और कर आधार दोनों में विस्तार हुआ।

    • कर संग्रह में वृद्धि, जिससे सरकारी व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में सहायता मिली

    • औपचारिककरण (formalization) को बढ़ावा, जिससे अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा

    • डिजिटल भुगतान और कर प्रशासन में सुधार, जिसने निवेशकों और व्यवसायों के भरोसे को मजबूत किया


 क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य और वैश्विक जोखिम

विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया की वृद्धि दर को 2025 में 6.6% रहने का अनुमान दिया है, लेकिन 2026 में यह घटकर 5.8% हो सकती है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ, जैसे मंदी और वैश्विक निवेश प्रवाह में उतार-चढ़ाव

  • व्यापारिक संरक्षणवाद (Trade Protectionism) में वृद्धि, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में

  • उभरती तकनीकों जैसे AI और ऑटोमेशन के कारण श्रम बाजार में अस्थिरता

  • क्षेत्रीय राजनीतिक अस्थिरता, जो निवेश और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है


 भारत के लिए प्रमुख जोखिम

  1. अमेरिका द्वारा 50% आयात शुल्क:
    अमेरिकी बाजार ने कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो कंपोनेंट्स पर 50% आयात शुल्क लगा दिया है।

    • निर्यात-आधारित क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव

    • विदेशी निवेशकों का विश्वास प्रभावित होने की संभावना

    • मध्यम अवधि में विदेशी व्यापार प्रदर्शन पर दबाव

  2. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ:
    तेल और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, और वैश्विक मुद्रास्फीति, भारत के निर्यात और उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।


 प्रमुख आँकड़े (Static Facts)

विषय विवरण / आँकड़े
FY26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि 6.5% (विश्व बैंक)
पूर्वानुमान (जून 2025) 6.3%
FY27 पूर्वानुमान 6.3% (संशोधित)
वृद्धि के मुख्य चालक मजबूत घरेलू मांग, ग्रामीण सुधार, जीएसटी सुधार
मुख्य जोखिम अमेरिका द्वारा 50% निर्यात शुल्क, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
दक्षिण एशिया वृद्धि (2025) 6.6%
दक्षिण एशिया वृद्धि (2026) 5.8% (संशोधित)

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