वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। World Health Organization (WHO) ने एक अतिरिक्त नवीन ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप-2 यानी nOPV2 को प्रीक्वालिफिकेशन (Prequalification) प्रदान कर दिया है।
यह निर्णय खास तौर पर सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डेराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-2 (cVDPV2) से होने वाले प्रकोपों के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत करेगा।
WHO की प्रीक्वालिफिकेशन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता मानकों पर खरी उतरती हो। इसके बाद UNICEF जैसी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ इसे बड़े पैमाने पर खरीद और वितरित कर सकती हैं — जिससे पोलियो उन्मूलन अभियानों को नई गति मिलेगी।
nOPV2 क्या है और क्यों है यह खास?
नवीन ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप-2 (nOPV2) एक उन्नत टीका है, जिसे विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है जहाँ टीकाकरण कवरेज कम होने के कारण cVDPV2 के फैलने का खतरा अधिक रहता है।
यह वैक्सीन पुराने OPV टीकों की तुलना में वैज्ञानिक रूप से अधिक सुरक्षित और स्थिर मानी जाती है।
प्रमुख विशेषताएँ:
✔ जीन संबंधी रूप से अधिक स्थिर संरचना
✔ घातक रूप में परिवर्तित होने का बेहद कम जोखिम
✔ वायरस के प्रसार को तेजी से रोकने की क्षमता
✔ लगभग 24 महीनों तक शेल्फ लाइफ
✔ सामान्य वैक्सीन तापमान पर सुरक्षित भंडारण संभव
यानी यह टीका न सिर्फ प्रभावी है, बल्कि लॉजिस्टिक दृष्टि से भी विकासशील देशों के लिए बेहद उपयोगी है।
भारत से जुड़ी बड़ी भूमिका: अब देश में भी होगा उत्पादन
हाल ही में प्रीक्वालिफाइड किया गया यह nOPV2 टीका अब Biological E Limited द्वारा भारत में निर्मित किया जा रहा है। इससे पहले इसका उत्पादन इंडोनेशिया की एक कंपनी कर रही थी।
भारत में उत्पादन शुरू होने से:
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वैश्विक वैक्सीन आपूर्ति अधिक मजबूत बनेगी
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आपातकालीन प्रकोपों में तेजी से टीका उपलब्ध होगा
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विकासशील देशों की निर्भरता सीमित होगी
यह कदम भारत को एक बार फिर दुनिया के प्रमुख वैक्सीन आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
पोलियो उन्मूलन में वैश्विक प्रभाव
1980 के दशक से अब तक दुनिया भर में टीकाकरण अभियानों के कारण पोलियो मामलों में 99% से अधिक की गिरावट आई है।
फिर भी, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था और कम टीकाकरण वाले क्षेत्रों में cVDPV2 के प्रकोप अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
नई प्रीक्वालिफिकेशन से:
प्रकोप नियंत्रण की वैश्विक क्षमता बढ़ेगी
वैक्सीन आपूर्ति में विविधता आएगी
तेज वितरण संभव होगा
पोलियो उन्मूलन के अंतिम चरण को मजबूती मिलेगी
WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने भी दोहराया है कि पोलियो उन्मूलन में टीकों की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों है यह विकास बेहद महत्वपूर्ण?
भारत को वर्ष 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था — जो दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक की सफलता थी।
हालाँकि विशेषज्ञ मानते हैं कि पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए निरंतर सतर्कता और उच्च टीकाकरण कवरेज बेहद जरूरी है।
nOPV2 से भारत को मिलने वाले फायदे:
✔ सुरक्षित और स्थिर वैक्सीन आपूर्ति
✔ आपातकालीन प्रकोप के लिए बेहतर तैयारी
✔ घरेलू उत्पादन से रणनीतिक आत्मनिर्भरता
✔ नियमित टीकाकरण अभियानों को मजबूती
भारत दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक संचालित करता है — ऐसे में यह नई वैक्सीन देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में अतिरिक्त भरोसा जोड़ती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)
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WHO ने अतिरिक्त nOPV2 वैक्सीन को प्रीक्वालिफिकेशन दी
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लक्षित वायरस: cVDPV2
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भारत में निर्माण: Biological E Limited
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पोलियो मामलों में वैश्विक गिरावट: 99%+
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भारत पोलियो-मुक्त घोषित: 2014

