भारतीय पैरा एथलीट Shailesh Kumar ने विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता भारत की राजधानी New Delhi में आयोजित की गई थी।
शैलेश कुमार ने पुरुषों की T63 श्रेणी की हाई जंप स्पर्धा में 1.84 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया। हालांकि यह प्रदर्शन उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 1.91 मीटर से थोड़ा कम रहा, फिर भी उन्होंने इस जीत को अपने नए प्रतिस्पर्धी सत्र की सकारात्मक शुरुआत बताया।
यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाड़ियों की क्षमता और प्रतिभा एक बार फिर सामने आई है।
चोट से उबरने के बाद सीजन की मजबूत शुरुआत
शैलेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष World Para Athletics Championships में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनके बाएं घुटने में दर्द की समस्या बनी हुई थी। इसी कारण उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया।
चोट से उबरने के दौरान उनके कोच और फिजियोथेरेपिस्ट की टीम ने उनकी फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया। इस दौरान उन्होंने धीरे-धीरे प्रशिक्षण शुरू किया ताकि वे बिना किसी जोखिम के प्रतियोगिताओं में वापसी कर सकें।
शैलेश के अनुसार, इस सत्र की शुरुआत में उनका मुख्य लक्ष्य रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि अपनी फिटनेस और तकनीक को फिर से मजबूत बनाना था। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला क्षण है और इससे आगे के टूर्नामेंटों के लिए उन्हें नई ऊर्जा मिली है।
एशियाई पैरा खेलों पर मुख्य लक्ष्य
इस प्रतिस्पर्धी सत्र में शैलेश कुमार का प्रमुख लक्ष्य Asian Para Games में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना है। एशियाई पैरा खेल भारतीय पैरा एथलीटों के लिए खेल कैलेंडर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है।
इसी कारण उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम इस प्रतियोगिता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए शैलेश विशेष रूप से अपनी टेक-ऑफ तकनीक पर काम कर रहे हैं। हाई जंप में टेक-ऑफ तकनीक बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यही वह क्षण होता है जब खिलाड़ी जमीन से उछाल लेकर ऊंचाई पार करता है।
शैलेश का मानना है कि तकनीकी सुधार के माध्यम से वे अपने 1.91 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड को पार कर सकते हैं। यदि वे अपनी तकनीक और फिटनेस को बेहतर बनाए रखते हैं, तो आने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में उनसे और भी बड़े प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।
प्रतियोगिता में कड़ी चुनौती का अभाव
स्वर्ण पदक जीतने के बाद शैलेश कुमार ने कहा कि इस प्रतियोगिता में उन्हें उतनी कड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा। इसका मुख्य कारण यह था कि भारत के ही दिग्गज पैरा हाई जंपर Mariyappan Thangavelu इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सके।
मरियप्पन थंगावेलु तीन बार के पैरालंपिक पदक विजेता हैं और वे हाई जंप T63 श्रेणी में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। हालांकि फिटनेस समस्याओं के कारण उन्हें इस प्रतियोगिता से हटना पड़ा।
शैलेश ने बताया कि वे और मरियप्पन दोनों Bengaluru में साथ प्रशिक्षण लेते हैं। उनके अनुसार, जब मजबूत प्रतिद्वंद्वी मैदान में होते हैं तो खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है और प्रतियोगिता का स्तर भी अधिक ऊँचा हो जाता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की प्रतियोगिताओं में यदि सभी शीर्ष खिलाड़ी भाग लेते हैं, तो मुकाबला और भी रोमांचक होगा।
वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में बड़ी भागीदारी
नई दिल्ली में आयोजित World Para Athletics Grand Prix में इस वर्ष बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
इस प्रतियोगिता में 200 से अधिक भारतीय पैरा एथलीटों ने भाग लिया, जिससे यह भारत में आयोजित सबसे बड़े पैरा एथलेटिक्स आयोजनों में से एक बन गया।
यह प्रतियोगिता उन खिलाड़ियों के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है जो पैरा खेलों की आधिकारिक श्रेणियों में क्लासिफिकेशन प्राप्त करना चाहते हैं। क्लासिफिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से यह तय किया जाता है कि किसी खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता के आधार पर उसे किस प्रतिस्पर्धी श्रेणी में भाग लेना चाहिए।
इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी देखने को मिली। कई देशों के खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा लिया, जिनमें रूस के 26 एथलीट भी शामिल थे। इससे प्रतियोगिता का स्तर और भी प्रतिस्पर्धी और अंतरराष्ट्रीय बन गया।
भारतीय पैरा खेलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
शैलेश कुमार की यह जीत भारत के पैरा खेलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पैरा एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।
ऐसी उपलब्धियाँ न केवल खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं, बल्कि देश में पैरा खेलों के प्रति जागरूकता और समर्थन को भी मजबूत करती हैं।
शैलेश कुमार की इस सफलता से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय पैरा एथलीट अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं और भविष्य में भी उनसे कई बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा सकती है।

