भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना (World’s Largest Grain Storage Plan – WLGSP) लागू करने की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य ज़मीनी स्तर पर डीसेंट्रलाइज़्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना, खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।
इस योजना की जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
योजना की आवश्यकता क्यों?
भारत विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन पर्याप्त और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर किसान फसल कटाई के तुरंत बाद अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
इसके अतिरिक्त, भंडारण की कमी के कारण बड़ी मात्रा में अनाज कटाई के बाद खराब भी हो जाता है। WLGSP का उद्देश्य इन चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान करना है।
मध्य प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले को पायलट जिले के रूप में चुना गया।
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बालाघाट की बहुदेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसायटी मर्यादित, परसवाड़ा में 500 मीट्रिक टन (MT) क्षमता वाला गोदाम निर्मित किया गया।
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इस गोदाम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी 2024 को किया।
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गोदाम को मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) ने किराए पर लिया है।
यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में देशभर में इसी मॉडल को लागू करने का आधार बनेगा।
सरकारी योजनाओं का कन्वर्जेंस मॉडल
WLGSP को PACS (Primary Agricultural Credit Societies) स्तर पर कई मौजूदा सरकारी योजनाओं के समन्वय (Convergence) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं:
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एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)
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एग्रीकल्चरल मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI) योजना
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सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM)
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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना (PMFME)
यह कन्वर्जेंस मॉडल संसाधनों के बेहतर उपयोग और तेज़ क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है।
प्रमुख वित्तीय और नीतिगत सुधार
सरकार ने PACS को अधिक सक्षम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:
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AIF के तहत ऋण चुकौती अवधि को 2+5 वर्ष से बढ़ाकर 2+8 वर्ष कर दिया गया है।
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मार्जिन मनी की आवश्यकता 20% से घटाकर 10% कर दी गई है।
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निर्माण लागत को संशोधित कर:
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₹7000 प्रति MT (मैदानी क्षेत्र)
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₹8000 प्रति MT (पूर्वोत्तर क्षेत्र) निर्धारित किया गया है।
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PACS के लिए सब्सिडी 25% से बढ़ाकर 33.33% कर दी गई है।
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आंतरिक सड़कों और वेब्रिज जैसी सहायक अवसंरचना के लिए अतिरिक्त सब्सिडी (स्वीकृत सब्सिडी का एक-तिहाई) प्रदान की जाएगी।
इन सुधारों से सहकारी संस्थाओं के लिए गोदाम निर्माण और संचालन अधिक व्यावहारिक और लाभकारी बनेगा।
किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ
डीसेंट्रलाइज़्ड स्टोरेज सिस्टम किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करेगा:
1. स्थानीय स्तर पर भंडारण
किसान अपनी उपज को गांव या ब्लॉक स्तर पर सुरक्षित रख सकेंगे।
2. प्लेज फाइनेंसिंग
गोदाम रसीद के आधार पर किसान बैंक से ऋण प्राप्त कर सकेंगे।
3. डिस्ट्रेस सेल से राहत
तुरंत बिक्री की मजबूरी कम होगी, जिससे किसान बेहतर बाजार मूल्य की प्रतीक्षा कर सकेंगे।
4. बेहतर मूल्य प्राप्ति
मांग और आपूर्ति के अनुसार सही समय पर बिक्री कर अधिक लाभ कमाया जा सकेगा।
यह विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
संभावित प्रभाव
WLGSP से निम्नलिखित सकारात्मक परिणामों की उम्मीद है:
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कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी
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परिवहन लागत में कमी
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कृषि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में दक्षता
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में मजबूती
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ग्रामीण स्तर पर वैज्ञानिक भंडारण को बढ़ावा
यह योजना सहकारिता आधारित विकास मॉडल को सशक्त करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
